IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है हिंदी में जानें

धारा  107  किसी  व्यक्ति  द्वारा  दुष्प्रेरण (Abetment)  करने  या दुष्प्रेरण  के  किसी  कार्य  या  बात  में  लिप्त  होने  पर  लागू  होता  है I भारतीय  दंड  संहिता  (Indian Penel Code)  IPC 1860  अध्याय  5 में  इसका  विवरण  स्पष्ट  किया  गया  है I  इस लेख  IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है  में  हम  आपको  धारा  107  क्या  है,  IPC 107  में  सजा  का  प्रावधान  क्या  है,  धारा  107  कब  लगती  है  इत्यादि  विषयों  के बारे  में  बताएँगे I

 

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है

IPC  धारा  107  क्या  है  I  आईपीसी  धारा  107  में  क्या  सज़ा  का  प्रावधान  है  I  IPC  धारा  107  में  दुष्प्रेरण  क्या  है  I  भारतीय  दंड  संहिता  1860   धारा  107  कब  लागू  होती  है  I  Indian  Penel  Code  Section  107  I  भारतीय  क़ानून  I  धारा 107 कब लगती है  I  धारा 107 सीआरपीसी  I  धारा 107 में क्या सजा है  I  धारा 107 में क्या होता है  I  ipc 107 in hindi  I  ipc 107 punishment in hindi  I  ipc 107/116 in hindi  I  ipc 107 kya hai  I  ipc 107 section  I  what is ipc 107 in hindi  I  ipc 107 bailable or not  I  ipc 107 section means

 

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है

IPC धारा 107  क्या  है  (IPC 1860 धारा 107 कब  लगती  है)

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है:  भारतीय  दंड  संहिता  में  धारा 107  को  किसी  व्यक्ति  द्वारा  दुष्प्रेरण (एबेटमेंट)  किये  जाने  पर  लागू  किया  जाता  है I  अगर  साधारण  शब्दों  में  कहें  तो  अगर  कोई  व्यक्ति  किसी  दूसरे  व्यक्ति  को  कोई  कार्य (बात)  करने  के  लिए  या  किसी  कार्य  से  रोकने  के  लिए  प्रेरित  करता  है,  उकसाता  है, सुझाव  देता  है  या  उत्साहित  करता  है  या  ऐसे  किसी  कार्य  में  एक  या  एक  से  अधिक  व्यक्तियों  के  साथ  लिप्त  होता  है  तो  उस  पर  और  संबंधित  अन्य  व्यक्तियों  पर  धारा  107  लागू  होती  है I

 

 

दुष्प्रेरण  क्या  है (IPC 107  What  Is  Abetment)

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है:  धारा  107  को  किसी  व्यक्ति  द्वारा  दुष्प्रेरण  किये  जाने  की  स्थिति  में Indian  Penel  Code  द्वारा  लगाई  जाती  है I  जब  कोई  व्यक्ति  किसी  को  कोई  बात  या  काम  करने  के  लिए  उकसाता  है  या  अन्य  व्यक्तियों  के  साथ  ऐसे  किसी  कृत्य  में  शामिल  होता  है  यह  दुष्प्रेरण  की  श्रेणी  में  आता  है I  लेकिन सामान्य  तौर  पर  किसी  को  किसी  बात  या  काम  के  लिए  उकसाना उकसाना  अपराध  की  श्रेणी  में  नही  आता  है I  परन्तु  जब  दुष्प्रेरण  में  कोई  गैरकानूनी  तत्व  (ILLegal Element/Act)  शामिल  हो  तो  यह  IPC  धारा  107  के  तहत  दुष्प्रेरण  की  श्रेणी  में  आता  है,  अर्थात  जब  कोई  व्यक्ति  किसी  को  गैरकानूनी/अवैध  कार्य  करने  के  लिए  प्रेरित  करता है  या  उकसाता  है  तो  यह  दुष्प्रेरण  कहलाता  है I  इंडियन  पेनेल  कोड  में  विभिन्न  प्रकार  के  दुश्प्रेरणों  के  बारे  में  उल्लेख  किया  गया  है I  जिनके  बारे  में  नीचे  बताया  गया  है I

 

Dhara 107 दुष्प्रेरण के  प्रकार (IPC 107: Types of Abetment)

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है:  IPC 107 धारा  के  तहत  दुष्प्रेरण  के  प्रकार  या  दुष्प्रेरण  के  अनिवार्य  तत्व  निम्नलिखित  हैं,  जिसके  आधार  पर  यह  तय  होता  है  कि  किया  गया  अपराध  किस  प्रकार  के  दुष्प्रेरण  की  श्रेणी  में  आता  है –

 

 1. उकसाना या  प्रोत्साहित  करना I

 2.  षड्यंत्र या  साजिश I

 3.  दुष्प्रेरण में  सहायता  करना I

इनके बारे  में  विस्तार  से  निम्न  प्रकार  समझ  सकते  हैं –

 

उकसाना  या  प्रोत्साहन  द्वारा दुष्प्रेरण

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है:  कोई अपराधिक  और  अवैध  कार्य  करने  के  लिए  किसी  को  उकसाना,  प्रेरित करना,  मनाना,  बहलाना-फुसलाना,  या  किसी  को  कोई  कार्य  करने  के  लिए  उत्तेजित  करना  जो  गैरकानूनी  हो  यह  करने  के  लिए  कोई  व्यक्ति  सीधे  तौर  पर  या  किसी  अन्य  साधन  द्वारा  किसी  को  अवैध  और  अपराधिक  गतिविधियों  के  लिए  सुझाव  देता  है  या  उकसाता  है  तो  यह  उकसाना या  प्रोत्साहन  द्वारा  दुष्प्रेरण  की  श्रेणी  में  आता  है I

उदाहरणतः  “A B और C तीन  व्यक्ति  हैं,  C  के  पास  एक  प्लाट (Plot) है I जो  B  हथियाना  चाहता  है  किन्तु  C,  B  को  प्लाट  नहीं  बेचना  चाहता I  ऐसी  स्थिति  में  B  एक  अन्य  व्यक्ति  A  जो  B  की  मंशा  से  परिचित  नही  है  को  C से  B  को  प्लाट  बेचने  के  लिए  कहता  है  या  मनाता  है  I किन्तु  C,  B  की  मंशा  से  अवगत  है  I”

ऐसी  स्थिति  में  अकेला  B  दुष्प्रेरण  का  अपराध  करता  है और  सज़ा  का  पात्र  होगा  चूंकि  A,  B  की  मंशा  से  ज्ञात  नही था I  अगर,  A,  B  के  इरादों  से  परिचित  होने  के  बावजूद  भी  ऐसा  करता  है  तो  वह  भी  दुष्प्रेरण  के  तहत  दोषी  होगा I

 

 

षड्यंत्र  या साजिश द्वारा दुष्प्रेरण

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है:  जब  किसी  साजिश  या  षड्यंत्र  में  दो  या  दो  से  अधिक  व्यक्ति  लिप्त  हों  और  उनके  द्वारा  किया  गया  साजिश  का  प्रयास  अपराध (Crime)  है  अपराध  के  समतुल्य  है  तो  यह  षड्यंत्र  द्वारा  दुष्प्रेरण  की  श्रेणी  में  आता  है I  और  अगर  यदि  यह  षड्यंत्र  संगीन  अपराध  की  परिभाषा  में  नहीं  आता  है  तो  यह  IPC  धारा  120A  के  अधीन  एक  दण्डनीय  षड्यंत्र  या  साजिश  है  जो  अपराधिक  साज़िश  (Criminal  Conspiracy)  है,  ऐसी  स्थिति  में  षड्यंत्र  या  साज़िश  के  तहत  दुष्प्रेरण  के  निम्न  तत्व  या  शर्तें  अनिवार्यत  होंगी –

  • षड्यंत्र या  साजिश  दो  या  दो  से  अधिक  व्यक्तियों  द्वारा  की  गई  हो I
  • उस साज़िश  से  कोई  गैरकानूनी  या  अवैध  कार्य  घटित  (Happened)  होगा I
  • षड्यंत्र या  साज़िश  द्वारा  कोई  ऐसा  कार्य  किया  गया  हो I
  • षड्यंत्र के  समय  ऐसे  कार्य  का  होना  अवश्य  है I

 

उदाहरणतः  एक  स्टोर  का  मालिक  जो  रात  को  आठ  बज़े  दिनभर  की  कमाई  लेकर  बाइक  पर  घर  के  लिए  निकलता है I  जॉन  जो  कि  एक  चोर  है  और  वह  स्टोर  के  मालिक  को  लूटना  चाहता  है  इसके  लिए  वह  एक  दूसरे  व्यक्ति  थॉमस  जिसके  पास  पिस्तौल  है  उससे  स्टोर  मालिक  को  लूटने  की  साज़िश  रचते  हैं  लेकिन  उनके  बाइक  नहीं  है I  इसके  लिए  वो  एक  तीसरे  व्यक्ति  जिसका  नाम  स्मिथ  है,  जिसके  पास  बाइक  है I  स्मिथ  जो  कि  जॉन  और  थॉमस  की  लूट  की  योजना  जानने  के  बाद  भी  उन्हें  अपनी  बाइक  देने  के  लिए  राज़ी  हो  जाता  है  और  उनकी  मदद  करता  है I  यहाँ  स्मिथ  साज़िश  द्वारा  दुष्प्रेरण  के  तहत  अपराधी  है I  हालाँकि  उसने  सीधे  तौर  पर  लूट  में  भाग  नहीं  लिया  परन्तु  लूट  की  साज़िश  जानने  के  बावजूद  जॉन  और  थॉमस  को  अपनी  बाइक  देकर  उनकी  मदद  की  है I

 

 

सहायता द्वारा दुष्प्रेरण और अवैध लोप (IPC 107: illegal Omission)

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है:  जब  कोई  व्यक्ति  जानबूझकर  किसी  ऐसी  गतिविधियों  में  शामिल  हो  जाता  है  जो  गैरकानूनी  और  अवैध  हों  तो  यह  सहायता  द्वारा  दुष्प्रेरण  की  श्रेणी  में  आता  है I  किसी  भी  अवैध  कार्य  को  पूरा  करने  के  लिए  जब  किसी  दूसरे  व्यक्ति  की  सहायता  ली  जाती  है,  और  वह  व्यक्ति  यह  जानने  के  बाद  भी कि  कार्य  अवैध  है  तो  यह  Indian Penel Code धारा 107  के  तहत  सहायता  द्वारा  दुष्प्रेरण  माना  जाता  है I

भारतीय  दंड  संहिता  धारा  107  में  यह  प्रावधान  है  कि  जब  किसी  व्यक्ति  द्वारा  अपराधिक  कार्य  में  सहायता  की  जाती  है  तो  उस  कार्य  में  लिप्त  होने  के  इरादे  के  साथ  उसकी  भागीदारी (Involment)  भी  शामिल  है I क्योंकि  जब  दुष्प्रेरक  को  उस  अवैध  कार्य  के  इरादे  और  कार्य  की  जानकारी  है  और  वह  अपनी  अपराधिक  मनःस्थिति  के  तहत  उसमें  सम्मिलित  होता  है,  तो  तभी  वह  सहायता  के  दुष्प्रेरण  का  अपराधी  होता  है  और  दंड  का  पात्र  बनता  है I अगर  उस  व्यक्ति  को  उस  अवैध  कार्य  की  जानकारी  नही  है  और  वह  भूलवश  उसमें  शामिल  होता  है  या  शामिल  करने  वाला  व्यक्ति  उसे  उस  कार्य  को  करने  के  अपने  इरादों  को  छिपाता  है  तो  वह  व्यक्ति  निरापराध  होगा  क्योंकि  उसे  उस  कार्य  के  अवैध  होने  की  जानकारी  नहीं  थी I

उदाहरण  के  लिए  क्लार्क  कोई  अवैध  कार्य  कर  रहा  है  और  वह  अपनी  सहायता  के  लिए  अपने  मित्र  विलियम  को  बुलाता  है  मगर  विलियम  को  उस  कार्य  के  अवैध  होने  की  जानकारी  नहीं  है I  वह  तो  महज़  अपने  मित्र  की  सहायता  के  इरादे  से  वह  काम  करता  है I  इस  स्थिति  में  विलियम  पर  सहायता  दुष्प्रेरण  की  जिम्मेदारी  नही  होगी  और  वह  निर्दोष  होगा I  क्योंकि  उसने  वह  अवैध  कार्य  इरादतन  नही  किया  है I  2016  में  बृज  लाल  बनाम  राजस्थान  राज्य  के  मामले  में  इसी  तरह  सर्वोच्च  न्यायालय  ने  कहा  की  इस  मामले  में अभियुक्त (Accused)  द्वारा  की  गई  सहायता  और  उसकी  उपस्थिति  सहायता  द्वारा  दुष्प्रेरण  के  अपराध  को  साबित  करने  के  लिए  पर्याप्त  नहीं  हैं  और  इन  आधारों  पर  अभियुक्त  को  दोषी  नहीं  ठहराया  जा  सकता I

 

 

अवैध लोप (ILLEGAL Omission)

IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है:  जब  कोई  व्यक्ति  अपने  क़ानून  द्वारा  प्रदत  नियमों  और  दायित्वों  का  पालन  नही करता  तो  यह  दुष्प्रेरण  का  अवैध  लोप  है I  जब  किसी  व्यक्ति  को  किसी  अपराध  के  होने  की  जानकारी  हो  परन्तु  वह  उस  कार्य  को  रोकने  में  विफल  रहे  या  रोकने  का  प्रयास  ना  करे  तो  वह  व्यक्ति  अवैध  लोप  दुष्प्रेरण  के  तहत  दोषी  होगा I  अवैध  लोप  को  विभिन्न  प्रकार  परिभाषित  किया  जा  सकता  है,  जैसे-  किसी  अपराध  को  किसी  ने  अपनी आँखों  से  देखा  हो  और  वह  उसे  रोकने  का  प्रयास  ना करे,  संभावित  अपराध  की  स्थिति  में  वह  करवाई  करने  के  बजाय  तथस्थ  रहे,  कोई  अपराध  जिसकी  आशंका  पहले  से  पर  व्यक्ति  अपने  कानूनी  दायित्वों  को  पूरा  कर  उसे  रोकने  में  विफल  हो  आदि  अवैध  लोप  दुष्प्रेरण  के  दायरे  में  आते  हैं I

उदाहरण  के  लिए  एक  कांट्रैकटर  पुल  बनाने  का  कॉन्ट्रैक्ट  लेता  है  और  वह  जानता  है  कि  इस  पुल  से  बहुत  भारी  वाहनों  का  आवागमन  होगा  किन्तु  वह  पुल  की  सुरक्षा  का  जो  स्टैंडर्ड  होना  चाहिए  था  उसमें  कटौती  कर  देता  है  और  इससे  हादसा  हो  जाता  है I  ऐसी  स्थिति  में  कांट्रैकटर  पर  अवैध  लोप  का  दुष्प्रेरण  का  दोष  होगा  क्योंकि  उसने  यह  जानते हुए  कि  पुल  की  क्षमता  कितनी  होनी  चाहिए  फिर  भी  उसमें  कटौती  की I

 

 

IPC धारा 107 में  कितनी  सज़ा  होती  है (Punishment Under IPC Section 107)

किसी  व्यक्ति  को  अवैध  कार्य  करने  के  लिए  प्रेरित करना,  सुझाव  देना,  उत्साहित  करना  आदि  बहुत  खतरनाक  अपराध  हैं I IPC Section 107 के  तहत  दुश्प्रेरणों  के  बारे  में  बताया  गया  है I  IPC  Section 108 (IPC धारा 108) के  तहत  यह  तय  किया  जाता  है  कि  दुष्प्रेरक  कौन  है  अर्थात  किसने  संबंधित  व्यक्ति  को  प्रेरित  किया  है  और  उसके  बाद  IPC धारा  109 (IPC Section 109)  के  तहत  किये  गये  दुष्प्रेरण  के  आधार  पर  सज़ा  का  प्रावधान  है I  IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है  के  तहत  दुष्प्रेरण  एक  अति  दंडनीय  अपराध  की  श्रेणी  में  आता  है,  ऐसे दुश्प्रेरणों  के  बहुत  से  मामलों  में  जमानत (Court Bail)  भी बहुत  मुश्किल  होती  है I

 

यह  भी  पढ़ें:   एकतरफा तलाक के नियम I 2023 I तरीका I कागजात I

 

 

FAQs:  IPC Dhara 107 IPC Section धारा 107 क्या है  से  जुड़े  अक्सर  पूछे  जाने  वाले  सवाल

 

Q.  IPC Section 107  में  उकसाने  का  क्या  अर्थ  है?

A.  किसी  व्यक्ति  को  अवैध  कार्य  करने  या  किसी  सही  कार्य  को  करते  हुए  रोकना, प्रत्यक्ष  या  अप्रत्यक्ष  रूप  से  उकसाना,  भड़काना,  उत्तेजित  करना,  प्रेरित  करना  आदि  शामिल  हो I

 

Q.  IPC की धारा 107 क्या है?

A.  जब  कोई  व्यक्ति  किसी  दूसरे  व्यक्ति  को  दुष्प्रेरण  करके  अर्थात  बहला फुसलाकर,  प्रेरित  कर,  सुझाव  आदि  देकर  उनसे  कोई  अवैध  या  गैरकानूनी  कार्य  करवाते  हैं,  या  किसी  साज़िश  द्वारा  अवैध  गतिविधियों  में  लिप्त  होते  हैं  I  तो  यह  अपराध  IPC  की  धारा  107  के  अधीन  आता  है I

 

Q.  A, B  पर  प्रहार  करना  चाहता  है  और  उसका  मित्र  C  उसे  अपनी  छड़ी  दे  देता  है, जिससे  A,  B  पर  प्रहार  कर  सके ।  C  किस अपराध का दोषी है?

A.  ऐसी  स्थिति  में  C  IPC Section 107  के  अधीन  दुष्प्रेरण  का  अपराध  का  दोषी I

 

Q.  दुष्प्रेरण किसे कहा जाता है?

A.  धारा  107  को  किसी  व्यक्ति  द्वारा  दुष्प्रेरण  किये  जाने  की  स्थिति  में Indian  Penel  Code  द्वारा  लगाई  जाती  है I  जब  कोई  व्यक्ति  किसी  को  कोई  बात  या  काम  करने  के  लिए  उकसाता  है,  प्रेरित  करता  है,  उत्त्साहित  करता  है,  या  अन्य  व्यक्तियों  के  साथ  ऐसे  किसी  कृत्य  में  शामिल  होता  है  यह  दुष्प्रेरण  की  श्रेणी  में  आता  है I  दुष्प्रेरण  के  तीन  प्रकार  हैं  – 1. उकसाना  या  प्रोत्साहित  करना I  2. षड्यंत्र  या  साजिश I  3. दुष्प्रेरण  में  सहायता  करना I

 

Q.  A  आपराधिक  इरादे  से  एक  8  वर्ष  के  उम्र  के  बच्चे  को  चोरी  के  लिए  दुष्प्रेरित  करता  है,  परन्तु चोरी  नहीं  की  गयी,  ऐसी  स्थिति  में  A  का  अपराध  किस  श्रेणी  में  आता  है?

A.  A  ने  यहाँ  दुष्प्रेरण  का  अपराध  किया  है,  जो  कि  IPC की  धारा  107  के  अंतर्गत  आता  है I

 

Q.  IPC  की  धारा  107  में  वकील  की  आवश्यकता  क्यों  होती  है?

A.  IPC की  धारा  107  के  अधीन  दुष्प्रेरण  का  दोषी  पाए  जाने  पर  IPC  की  धारा  109  (IPC Section 109)  के  तहत  सज़ा  का  प्रावधान  है I  धारा  109  के  अधीन  आने  वाली  सजाएं  गैर-जमानती  (Non-Bailable)  होती  हैं,  इसलिए  किसी  पारांगत  वकील  के  माध्यम  से  केस  लड़ना  चाहिए  ताकि  केस  जीतने  की  संभावना  हो I 

 

Q.  IPC  की  धारा  107 (2)  और  धारा  120 (क)  के अंतर्गत  षडयंत्र  में  क्या  अंतर  है?

A.  IPC धारा  120  (क)  के  अंतर्गत  षड्यंत्र  मात्र  सहमती  ही  अपराध  की श्रेणी  में  आती  है, अगर  यह  सम्मति  किसी  अवैध  या  गैरकानूनी  कार्य  करने  के  इरादे  से  की गई  हो,  किन्तु  धारा  107 (2)  के  अधीन  षड्यंत्र  के  लिए  महज़  एक  समझौता  मात्र  पर्याप्त  नही  होता  है,  इसके  लिए  किसी  अवैध  या  गैरकानूनी  काम  प्रयास  लाज़िम  है,  भले  वो  काम  सफल  या  विफल  हो I

 

Q.  किन  कार्यों  द्वारा  दुष्प्रेरण  का  अपराध  किया  जा  सकता  है? 

A.  दुष्प्रेरण  के  लिए  तीन  तत्व  हैं,  जिस  आधार  पर  दुष्प्रेरण  का  अपराध  किया  जाता  है, 1. उकसाना  या  प्रोत्साहित  करना I  2. षड्यंत्र  या  साजिश I  3. दुष्प्रेरण  में  सहायता  करना I

 

Q.  IPC  की  किस  धारा  के  अन्तर्गत  षड्यंत्र  या  साज़िश  द्वारा  दुष्प्रेरण  का  प्रावधान  किया गया है?

A.  भारतीय  दंड  संहिता  (Indian Penel Code)  की  धारा  107  के  अधीन  दुष्प्रेरण  को  परिभाषित  किया  गया  है I

 

Q.  कोई व्यक्ति कब सहायता द्वारा किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है?

A.  ऐसी  स्थिति  में  वह  व्यक्ति  अपराध  घटित  होने  से  पूर्व  या  अपराध  के  घटित  होने  के  दौरान  दुष्प्रेरण  करता  है I 

 

Q.  कोई  व्यक्ति  किसी  बात  के  किये  जाने  का  दुष्प्रेरण  कब  करता  है? 

A.  IPC Section 107  के  तहत  कोई  व्यक्ति  दुष्प्रेरण  तब  करता  है, जब  वह  किसी  व्यक्ति  को  अवैध  बात  या  कार्य  करने  के  लिए  उकसाता  या  प्रेरित  करता  है, या

  1. किसी कार्य को  करने  के  लिए  दो  या  दो  से  अधिक  लोग  साज़िश  या  षड्यंत्र  में  लिप्त  होते  हैं,  जिसका  उद्देश्य  कोई  अवैध  या  गैरकानूनी  कार्य  हो, या
  2. किसी कार्य को  करने  के  लिए  किसी  अवैध  कार्य  में  सहायता  करना  या  अवैध  लोप  करना  शामिल  हो I

 

Q.  आईपीसी  (IPC)  के  अन्तर्गत  दुष्प्रेरण  किन  तरीकों से  गठित  होता  है? 

A.  IPC Section 107  के  अधीन  दुष्प्रेरण  के  तीन  तत्व  बताये  गये  हैं –

  1. उकसाना या  प्रोत्साहित  करना I
  2. षड्यंत्र या  साजिश I
  3. दुष्प्रेरण में  सहायता  करना I

 

 

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निष्कर्ष (Final  Words)

IPC 1860  अध्याय 5  की  धारा  107  के  तहत  हमने  जाना  कि  धारा  107 क्या  है और  यह  कब  लगती  है आदि I धारा  107  के  तहत  दुश्प्रेरणों  को  परिभाषित  किया  गया  है कि  कौन  और  कौनसे  कृत्य  दुश्प्रेरणों  की  श्रेणी  में  आते  हैं I

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QUERY  SOLVED

क्या  है  IPC  Section  107  I  What  is  ipc  section 107  I  indian  penal  code 107  I  ipc  section 107  the  person  abets  the  doing  of  any  thing  which  ipc  107  meaning  definition  law  and  order  offenses  I  IPC  Section  107  I  आईपीसी  की  धारा 107  I  Indian  Penal  Code  Section  107  I  इंडियन  कानून  आईपीसी  धारा 107  I  Section  107  of  the ipc I  ipc  section  107  in  hindi |  IPC  Section  107  In  Hindi  |  आईपीसी  धारा  107  क्या  है  |  What  is  IPC  Section  107  |  आईपीसी  धारा  107  कब  लगती  है  |  आईपीसी  धारा  107  क्यों  लगती  है  |  धारा  107  में  क्यों  वकील  की  ज़रूरत  होती  है  |  धारा  107  के  मुख्य  तत्व  |  IPC  107  Elements   I  Legal  aptitude  indian  penal  code  abetment  under  section  107  ipc  instigation  conspiracy  aid  I  ipc  107  in  hindi  I  आईपीसी  धारा  107  क्या  है  |  IPC  107  in  Hindi  |  धारा  107  में  दुष्प्रेरण  का  अर्थ  I  IPC  की धारा 107 |  धारा 107  भारतीय दण्ड संहिता  |  107  IPC  In  Hindi  I  Ipc  की  धारा 107    I   IPC   Dhara   107   kya   hai  I   IPC   Section   107   kya   hai  I  bhartiya   dand   sanhita   dhara   107   kya   hai  I   dhara   107  kab   lagti  hai   I   ipc   dhara   107   me  kitni   saja  hoti  hai  I

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