एकतरफा तलाक के नियम I 2023 I तरीका I कागजात I

अगर बात करें एकतरफा तलाक के नियम तो आप इस तथ्य से ज्ञात ही होंगे कि देशभर में तलाक सम्बन्धी मामलात दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं I अपितु विश्वभर में भी तलाक सम्बन्धी जानें कितने मामले सामने आ रहे हैं I एक रिपोर्ट के मुताबिक तलाक को लेकर हर रोज़ हजारों लोग गूगल पर सर्च करते नज़र आते हैं कि एकतरफा तलाक कैसे लिया जाता है? या तलाक कैसे लिया जाता है I भारतीय संस्कृति और कल्चर की बात करें तो भारतीय संस्कृति में शादी के बाद तलाक का कोई स्थान नही है, किन्तु मॉडर्न जीवन-शैली और बढ़ रही जरूरतों के कारण यह प्रथा अब भारतीय कल्चर में भी शामिल हो गयी है I

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एकतरफा तलाक के नियम

 

 

एकतरफा तलाक के नियम (New Rules For Divorce Unilateral Divorce Process)

एकतरफा तलाक के नियम भारतीय जीवन शैली में बढ़ रहे पाश्चात्य शैली के प्रभाव ने भी भारतीय जीवन को बहुत हद तक प्रभावित किया है I और इसी प्रभाव का परिणाम है कि तलाक प्रथा अब भारतीय संस्कृति में गहराई तक उतर गयी है I लेकिन हमें इस पहलु पर भी गौर फरमाना चाहिए कि अगर पति पत्नी में से कोई एक या दोनों एक दुसरे से खुश नही हैं या कोई एक पक्ष लगातार हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहा है तो ऐसे में वह कब तक इस स्थिति को झेलता रहेगा I एकतरफा तलाक के नियम इस तरह के विवाह बंधन से तलाक लेने में शायद कोई हर्ज़ नही है और कई बार स्थितियां भी ऐसी पैदा हो जाती हैं कि पति –पत्नी का साथ रहना भी संभव नही हो पता है I

 

 

एकतरफा तलाक के नियम (How To Take One Side Divorce In India Talak Ke Niyam)

एकतरफा तलाक के नियम एकतरफा तलाक कि प्रिक्रिया पूर्ण रूप से कानूनी प्रिक्रिया है I जिसके कई आधार हो सकते हैं I इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि एकतरफा तलाक के नए नियम 2023,  एकतरफा तलाक कैसे लिया जाता है? एकतरफा तलाक लेने की प्रिक्रिया क्या है? एकतरफा तलाक लेने के नये नियम-अधिनियम क्या हैं? इसके साथ हम और भी कई बातों पर हम आपको पूरी जानकारी देंगे I अंत तक हमारे साथ बने रहिये, तो चलिए शुरू करते हैं –

 

 

तलाक कितने प्रकार के होते हैं (Types Of Divorce)

एकतरफा तलाक के नियम: तलाक लेने के आधार पर तलाक को दो प्रकारों में विभाजित किया गया है I इस प्रकार –

  1. आपसी मर्ज़ी/रजामंदी तलाक
  2. एकतरफा तलाक

 

 

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आपसी मर्ज़ी/रजामंदी तलाक (Divorce by Mutual Consent)

जब दोनों पक्ष (पति-पत्नी) एक-दुसरे से अपनी मर्ज़ी के अनुसार सम्बन्ध विच्छेद करना चाहते हैं तो इस तलाक को आपसी मर्ज़ी या रजामंदी तलाक कहा जाता है I

एकतरफा तलाक के नियम: इस तलाक के कई अधार हो सकते हैं जैसे, पति-पत्नी एक दुसरे से खुश नही हैं I दोनों के रहन सहन या चाल चलन में बहुत अंतर हो आदि जैसे कारणों की वजह से पति-पत्नी एक दूसरे से तलाक ले सकते हैं I

आपसी मर्ज़ी/रजामंदी तलाक की प्रिक्रिया काफी आसान रहती है, इसमें दोनों पक्षों की रजामंदी निहित होती है I क्योंकी पहले अपने स्तर पर दोनों पक्षों और दोनों पक्षों के सग्गे-संबंधियों द्वारा संपत्ति और संसाधनों का बंटवारा कर लिया जाता है I एकतरफा तलाक के नियम और साथ ही अगर दंपत्ति के बच्चे हैं तो उनके अधिकार (कस्टडी) को लेकर भी घरेलू स्तर पर बात हो जाती है I इसलिए यह प्रक्रिया थोड़ी आसान हो जाती है I उसके बाद पति-पत्नी कोर्ट में तलाक के लिए आवेदन कर सकते हैं I यह प्रक्रिया एकतरफा तलाक की बजाये सरल है I

एकतरफा तलाक कैसे लिया जाता है? लेकिन आपसी मर्ज़ी या रजामंदी तलाक की प्रिक्रिया एकतरफा तलाक से कई स्थितियों में लम्बी हो सकती है, क्योंकि तलाक के लिए आवेदन करने से पूर्व पति-पत्नी को 1 साल तक अलग रहना होता है I और इसके साथ तलाक के लिए आवेदन करने के बाद कोर्ट द्वारा पति-पत्नी को 6 महीने का कूलिंग पीरियड (समझौते के लिए) दिया जाता है, कि वो अगर इस अवधी के दौरान समझौता करना चाहें और फिर से उनका एक दूसरे के साथ रहने का विचार बने तो वो रह सकते हैं I इसलिए आपसी रजामंदी तलाक की प्रिक्रिया एकतरफा तलाक की बजाय कुछ स्थितियों में अधिक लम्बी हो जाती है I

 

 

एकतरफा तलाक क्या होता है? (What is Unilateral Divorce or One Sided Divorce)

एकतरफा तलाक के नियम जब दोनों पक्षों (पति-पत्नी) में से सिर्फ एक पक्ष तलाक लेना चाहता हो और दूसरा पक्ष तलाक न देना चाहता हो I इस स्थिति में होने वाले तलाक को एकतरफा तलाक कहा जाता है I

एकतरफा तलाक के नियम के कई आधार हो सकते हैं, जिनके बिनाय पर एक पक्ष दूसरे पक्ष से तलाक लेने के लिए कोर्ट में याचिका दर्ज करा सकता है I इन आधारों के बारे में हम आगे जानेगें I

एकतरफा तलाक की प्रिक्रिया कानूनी रूप से थोड़ी कठिन होती है, क्योंकि इसमें एक पक्ष तलाक लेने के हक़ में नहीं होता है I एकतरफा तलाक के नियम और जिन आधारों के तहत एक पक्ष तलाक के लिए आवेदन करता है उन आधारों को कोर्ट में उचित सबूतों के तहत भी साबित करना होता है I

 

एकतरफा तलाक लेने के आधार (Grounds for Unilateral Divorce)

Ektarfa Talak Ke Niyam 2023: एकतरफा तलाक लेने के कई आधार हो सकते हैं I यह जिस पक्ष द्वारा तलाक के लिए आवेदन किया जा रहा है उस पक्ष को समझना होगा कि वह किस आधार एकतरफा तलाक के नियम पर तलाक के लिए आवेदन कर रहा/रही है क्योंकि उसे उस आधार से सम्बंधित दस्तावेजों को भी कोर्ट में प्रस्तुत करना होगा और उन दस्तावेजों की पुष्टि के उपरांत ही कोर्ट तलाक पर विचार करेगा I एकतरफा तलाक लेने के मुख्या आधार इस प्रकार हैं –

 

धर्म बदलना –  विवाहौप्रांत किसी पक्ष द्वारा अपने धर्म को बदलना भी तलाक का आधार हो सकता है I जैसे कि हमारे भारतीय संविधान में किसी जाती या धर्म को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया गया है I सभी जातियों और धर्मों को समान अधिकार दिए गये हैं I तो ऐसे में अंतरजातीय विवाह में बहुत बढ़ोतरी हुई है और भारतीय संविधान में यह स्पष्ट है कि अगर कोई अंतरजातीय विवाह करता है तो उसे दूसरे पक्ष का धर्म अपनाने की जरुरत नहीं है I एकतरफा तलाक कैसे लिया जाता है? दोनों पक्ष अपने-अपने धर्म में रहते हुए भी अंतरजातीय विवाह कर सकते हैं (यह पूर्णता उनकी अपनी इच्छा पर निर्भर है अगर वो अपना धर्म बदलना चाहतें है तो) I लेकिन यदि विवाह उपरांत कोई एक पक्ष दूसरे पक्ष को उसके धर्म को लेकर प्रताड़ित करता है और धर्म परिवर्तन के लिए विवश करता है तो इस स्थिति में दूसरा पक्ष तलाक की मांग कर सकता है I यह भी एकतरफा तलाक का आधार है I

 

बाहरी सम्बंध होना –  अगर दोनों पक्षों (पति-पत्नी) में से कोई एक पक्ष बाहरी सम्बंध रखता है अर्थात शारीरिक सम्बंधी क्रियायों में लिप्त रहता होता है लेकिन वह दूसरे पक्ष से सम्बंध विच्छेद भी नहीं करना चाहता तो दूसरा पक्ष इस आधार पर तलाक की मांग कोर्ट में कर सकता है I

 

संगीन शारीरिक या मानसिक रोग –  अगर दोनों पक्षों में से कोई एक पक्ष किसी संगीन शारीरिक या मानसिक रोग़ से पीड़ित हो, जैसे एड्स, अन्य यौन रोग, पागलपन या कोई ऐसा रोग जिसका इलाज संभव ना हो, तो ऐसी स्थिति में दूसरा पक्ष एकतरफ़ा तलाक ले सकता है I

 

शारीरिक दुर्बलता/कमजोरी –  यदि पति-पत्नी में से कोई एक शारीरिक दुर्बलता, कमजोरी या नपुंसकता से ग्रस्त हो तो ऐसी स्थिति में भी दूसरा पक्ष एकतरफा तलाक के लिए आवेदन कर सकता है I

 

घरेलू हिंसा –  अगर पति-पत्नी में से कोई भी एक पक्ष दूसरे पक्ष के साथ मारपीट, हिंसा, क्रूरता, मानसिक प्रताड़ना या शारीरिक प्रताड़ना आदि करता है तो दूसरा पक्ष इस आधार पर तलाक की मांग कर सकता है I

 

बिना जानकारी लापता होना या छोड़ जाना –  यदि दोनों पक्षों (पति-पत्नी) में से कोई भी एक पक्ष 7 साल से लापता हो या छोड़कर चला गया हो और दूसरे पक्ष को इसकी जानकारी ना हो या उसकी जीवित या मृत होने की जानकारी ना हो तो ऐसे हालातों में दूसरे पक्ष द्वारा आवेदन कर एकतरफा तलाक लिया जा सकता है I

 

सन्यास ग्रहण –  अगर दोनों पक्षों में से कोई एक पक्ष सन्यास ग्रहण कर लेता है और अपने घर और रिश्ते नातों का परित्याग कर चला जाता है तो पक्ष इस आधार पर एकतरफा तलाक ले सकता है I

 

नोट –  एकतरफा तलाक के नियम (Ek Tarfa Talak Kaise Liya Jata Hai ) की प्रिक्रिया कानूनी प्रिक्रिया है I किसी पक्ष के तलाक की श्रेणी ऊपर दिए गये किसी भी आधार के अधीन हो सकती है I आपके द्वारा जिस भी आधार के बिनाय पर कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की जाती है उससे संबंधित दस्तावेजों को कोर्ट में पेश करना होता I आपको तलाक लेने के आधार को उचित ठहराना होगा I

 

 

 

भारतीय संविधान में तलाक नियम/अधिनियम ( Divorce Rules/Act in Indian Constitution)

एकतरफा तलाक के नियम: भारतीय संविधान में अलग-अलग धर्मो के आधार पर अलग-अलग अधिनियमों की वयवस्था की गयी है I एकतरफा तलाक के नियम आप किसी भी तलाक के लिए आवेदन करते हैं तो वह निम्न अधिनियमों के तहत आता है –

  • हिन्दू मैरिज एक्ट 1955
  • इंडियन डाइवोर्स एक्ट
  • पारसी मैरिज एक्ट 1936
  • स्पेशल मैरिज एक्ट 1954
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ

 

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तलाक लेने के लिए आवश्यक डाक्यूमेंट्स (Documents Required for Divorce)

एकतरफा तलाक के नियम (Ek Tarfa Talak Kaise Liya Jata Hai) पूर्णत कानूनी प्रिक्रिया है I इसलिए कानून में तलाक लेने के लिए कुछ कागजात जमा कराने का प्रावधान है I जिन्हें निम्न प्रकार सरणी-बंध किया गया है –

  • शादी का प्रमाण पत्र (Marriage certificate)
  • विवाह की चार तस्वीरें (Four wedding photos)
  • एक वर्ष अलग रहने का प्रमाण (Proof of living apart for one year)
  • समझौते के प्रयासों सम्बंधी साक्ष्य (Evidence of reconciliation efforts)
  • पति-पत्नी के परिवार के बारे में (Information about the family of both sides)
  • पेशे का विवरण
  • संपत्ति व मालिकाना हक़ सम्बंधी दस्तावेज़ (Property and ownership details)
  • आवास का प्रमाण (Proof of residence)
  • आय की जानकारी

 

 

 

एकतरफा तलाक कैसे लिया जाता है? (How To Get Unilateral Divorce) आवेदन कैसे करें? 

अब हम ब्लॉग के उस पड़ाव में पहुँच गये हैं जहाँ हम आपको बताएँगे कि एकतरफा तलाक के नियम (एकतरफा तलाक कैसे लिया जाता है?) तलाक के आवेदन का प्रोसेस कुछ कानूनी प्रावधानों के तहत आता है, जिनके अनुसार ही आप तलाक के लिए आवेदन कर सकते हैं I एकतरफा तलाक की प्रिक्रिया इस प्रकार है-

तलाक के दस्तावेज तैयार करवाए  सबसे पहले जिस पक्ष को तलाक के लिए आवेदन करना है उसे अपने वकील से बात कर सभी आवश्यक दस्तावेजों और प्रमाण-पत्रों और तय शुल्क के साथ फैमिली कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत करना है।

दूसरे पक्ष को सम्मन – आवेदन मिलने के पच्छात कोर्ट द्वारा दूसरे पक्ष को सम्मन भेजा जाता है I जिसमे उन्हें तय तारिख पर अदालत में पेश होना पड़ता है I

दोनों पक्षों की कोर्ट में उपस्थिति   सम्मन मिलने के बाद दोनों पक्षों को न्यायालय द्वारा तय तारिख के अनुसार न्यायालय में हाजिरी देनी होती है I

अगर कोई पक्ष तय तारीख को अदालत में पेश नही होता है तो उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अदालत फैसला सुना देती है I

कोर्ट द्वारा दोनों पक्षों के बीच मध्यस्था   अगर सम्मन प्राप्त कर दूसरा पक्ष तय तिथि पर कोर्ट में पहुँचता है तो यह कोर्ट द्वारा दोनों पक्षों के बीच मध्यस्ता की जाती है और बातचीत से मामला हल करने का प्रयास किया जाता है I

न्यायालय में याचिका दायर करना   अगर फैमिली कोर्ट में बातचीत के तहत भी मामला हल नही होता है तो आवेदनकर्ता दूसरे पक्ष के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।

लिखित बयान  इसके बाद न्यायालय में सुनवाई होती है और  दोनों पक्षों के 3 महीने के लिखित बयाँन लिए जाते हैं I

अंतिम निर्णय  इसके बाद दोनों पक्षों की अंतिम सुनवाई न्यायालय में होती है एवं प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों के अनुसार कोर्ट अपना अंतिम निर्णय देता है I

 

एकतरफा तलाक के नियम इस प्रोसेस के तहत कोई पक्ष एकतरफा तलाक ले सकता है I

 

 

 

विभिन्न देशों में होने वाले तलाकों की दर (Divorce Rates In Different Countries)

एकतरफा तलाक के नियम (एकतरफा तलाक कैसे लिया जाता है) विभिन्न देशों में होने वाले तलाक की दर को नीचे सरणी में दर्शाया गया है I

*तलाक दर प्रति एक हजार पर होने तलाक की संख्या को दर्शाता है

 

देश

तलाक दर (प्रति एक हज़ार)

मालदीव्

5.5

कजाखिस्तान

4.6

रूस

3.9

मोल्दोवा

3.8

बेलारूस

3.7

बेल्जियम

3.7

चीन

3.2

जॉर्जिया

2.9

यूक्रेन

2.9

 

 

 

FAQs

Q. भारत में तलाक लेने के मुख्य कारण कौन से है ?

A. हमारे देश में तलाक के प्रमुख कारण निम्न प्रकार हैं –

  • धर्म बदलना

  • बाहरी सम्बंध

  • घरेलू हिंसा

  • संगीन शारीरिक या मानसिक रोग

  • बिना जानकारी लापता होना या छोड़ जाना

  • सन्यास ग्रहण

 

Q. एकतरफा तलाक क्या है ?

A. जब दोनों पक्षों (पति-पत्नी) में से सिर्फ एक पक्ष तलाक लेना चाहता हो और दूसरा पक्ष तलाक न देना चाहता हो I इस स्थिति में होने वाले तलाक को एकतरफा तलाक कहा जाता है I जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष से किसी कारणवश खुश नही होता है और वह विवाह सम्बंध विच्छेद करना चाहता है I

 

Q. भारतीय संविधान में कौनेसे अधिनियम तलाक से सम्बंधित हैं?

A. भारतीय संविधान में निम्न अधिनियम तलाक से सम्बंधित हैं, जिनके तहत कोई व्यक्ति तलाक का आवेदन कर सकता है –

  • हिन्दू मैरिज एक्ट 1955

  • इंडियन डाइवोर्स एक्ट

  • पारसी मैरिज एक्ट 1936

  • स्पेशल मैरिज एक्ट 1954

  • मुस्लिम पर्सनल लॉ

 

Q. एकतरफा तलाक में कितना समय लगता है?

A. यह पूर्णत केस की की प्रक्रती पर निर्भर करता है लेकिन सामान्य तौर पर 6-7 महीने मान सकते हैं I

 

Q. जल्दी तलाक कैसे ले?

A. जल्दी तलाक लेने का एक ही आधार है कि जिसमें दोनों पक्ष आपसी सहमती से तलाक के लिए आवेदन करें, इस आधार पर आपको तलाक जल्दी मिल जायेगा I

 

 

 

निष्कर्ष

अगर बात एकतरफा तलाक के नियम की करें तो बेशक यह प्रथा हमारे देश में पच्छात्य संस्कृति का प्रभाव है लेकिन यह भी बहुत हद तक सच है कि आजकल गृह क्लेश और मानसिक/शारीरिक प्रताड़ना के केस आये दिन सामने आ रहे हैं I ऐसी स्थिति में हर रोज़ दुःख और परेशानियों से जूझते रहने से अलग होना बेहतर होता है I आप इस मामले में क्या राय रखते हैं आप निचे कमेंट बॉक्स में जरुर साझा करें I

इस ब्लॉग एकतरफ़ा तलाक कैसे लिया जाता है पर हमने विस्तृत जानकारी देने का प्रयास किया है अगर आपको हमारा ब्लॉग पसंद आया हो क्रप्या इसे अन्य लोगों तक भी शेयर करें I

हम आपके सुखी जीवन की कामना करते हैं I मिलते हैं आपसे एक नये ब्लॉग में तब तक खुश रहें आबाद रहें I

 

 

 

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